तबादलों को लेकर पटवारियों में असंतोष, कांग्रेस नेताओं के प्रभाव में हो रहे प्रशासन के फैसले!

नीमच। इन दिनों पूरे मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार के तबादला उद्योग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में नीमच में भी प्रशासन के अधीन विभिन्न विभागों में कई तबादले हुए हैं। तबादलों से वैसे तो कई अधिकारी, कर्मचारी आहत हैं लेकिन खुलकर असंतोष पटवारियों का सामने आया है। बताया जा रहा है कि पटवारी संघ के पदाधिकारियों पर भी गाज गिरी है जबकि पटवारी संघ और सरकार के बीच हुई सुलह वार्ताओं में तय नीति का स्पष्ट उल्लंघन हो रहा है।  जानकारी के अनुसार हाल ही मंे जिले में करीब 15 पटवारियों के तबादले हुए हैं। इनमंे ऐसे पटवारी भी हैं जो पटवारी संघ के पदाधिकारी हैं। विरोध इस बात को लेकर है कि संघ पदाधिकारी पटवारियों पर भी इस ताबड़तोड़ तबादले की व्यवस्था में गाज गिर गई है। जबकि पटवारी संघ के प्रदेश पदाधिकारियों का कहना है कि पूर्व में शासन-प्रशासन के साथ हुई विभिन्न वार्ताओं मंे यह व्यवस्था तय की जा चुकी है कि संगठन के पदाधिकारियों के तबादले दो कार्यकाल पूर्व न किए जाएं। एक कार्यकाल न्यूनतम 3 वर्ष का बताया जाता है। लेकिन नीमच जिले में कई ऐसे पटवारियों के तबादले भी हो गए हैं जिन्हें दो वर्ष भी अपने हल्कों में नहीं हुए हैं। नीति के अनुसार पटवारियों के संगठन के अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, उपाध्यक्ष जैसे पदों पर काबिज पटवारियों के स्थानांतरण में नीति का खयाल रखा जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। इसका उदाहरण पटवारी दिलीप सिंह चुंडावत का तबादला भी है जो पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष हंै। 
बताया जा रहा है कि पटवारियों के तबादलांे में कांग्रेस के नेताओं की भी भूमिका रही है। नेताओं के दबाव मंे पटवारियों के तबादले होने की बातें सामने आ रही हैं, इन स्थितियों को लेकर पटवारियों में रोष है, हालांकि चुनाव आचार संहिता के चलते इस मामले में खुलकर कोई सामने नहीं आ पा रहा है। 
-
प्रशासनिक दृष्टि से तबादला किया जा सकता है। जो भी स्थानांतरण हुए हैं वे प्रशासनिक व्यवस्था के तहत किए गए हैं। इसमें कोई अलग बात नहीं है। - राजीव रंजन मीना, कलेक्टर नीमच