खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजू सौलंकी के कारनामे, आखिर क्या कारण है कि खाद्य सुरक्षा की कार्रवाइयों में सबसे कम राजस्व मिल रहा नीमच जिले से, कार्रवाइयां भरपूर, जुर्माना नगण्य, सजा इक्का दुक्का!

नीमच। तमाम विभागों में तीन साल से अधिक समय तक जमे अधिकारी इधर से उधर हो गए लेकिन नीमच में खाद्य सुरक्षा विभाग ऐसा है जहां पर एक अधिकारी के पांव अंगद की ही तरह जमे हैं। सरकार किसी भी दल की हो इनकी जमावट बेहतरीन है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन खाद्य एवं औषधी प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी है कि नागरिकों को शुद्ध खानपान मिले। जहां पर मिलावटी, दूषित खाद्य पदार्थ या खानपान के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक सामग्री की जानकारी मिलती है तो कार्रवाई करने का जिम्मा खाद्य सुरक्षा अधिकारी का रहता है। नीमच में राजू सौलंकी नाम के अधिकारी है जो आए दिन सुर्खियों में रहते हैं। खाद्य सुरक्षा इकाई की हालत यह है कि इतनी कार्रवाइयों के बावजूद नीमच में मिलावटी या गुणवत्ताविहीन खाद्य पदार्थ पूरी तरह समाप्त हो गए हैं इस बात की ग्यारंटी कोई नहीं ले सकता। पिछले वर्षों में जिन दुकानों या संस्थानों से सेंपल लिए गए उनमें से कई ऐसे पाए गए जो जांच में पास हो गए। जहां गड़बड़ी पाई गई उन मामलों में भी जुर्माना बहुत कम है। गड़बड़ी करने वालों को सजा प्रावधान है लेकिन इसका भी प्रभाव नहीं दिखता। हालात यह है कि कई बार तो कार्रवाई होने से पहले ही संबंधित व्यापारी को सूचना पहुंच जाती है। ऐसे में गड़बड़ी पकड़ने में ही नहीं आती है और कहने को कार्रवाई जांच भी हो जाती है। 
जानकारी मिली है कि नीमच से छोटे जिलों में एक वर्ष की कार्रवाई में करीब 50 से 60 लाख तक के जुर्माने आरोपित हुए हैं जबकि नीमच में इस आंकडे का आधा भी जुर्माना नहीं हुआ है। दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि प्रति माह करीब 40 सर्विलांस सेंपल अनिवार्य रुप से लिए जाने चाहिए जबकि यहां पर इसकी आधी कार्रवाई भी नहीं हो रही है। 
इस खबर के विस्तार में जस्ट नीमच पर आपको मिलेगी और भी चैंकाने वाली जानकारियां।