चाणक्य नीतिः पति-पत्नी और सरकार को भुगतनी पड़ती है इनके भी कर्मों की सजा

2018-12-04 11:26:09

शास्त्रों के अनुसार, हर किसी को अपने कर्मों की सजा मिलती है लेकिन आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों के माध्यम से यह समझाया है कि किसी व्यक्ति को केवल उनके कर्मों का फल ही नहीं भोगना पड़ता है बल्कि सांसारिक दृष्टि से उन्हें अपने से जुड़े लोगों के कर्मों का भी परिणाम भोगना पड़ता है इसलिए इनके प्रति भी आपको ध्यान रखने की जरूरत होती है।

इन्हें मिलती है जनता के कर्मों की सजा

राजा राष्ट्रकृतं पापं राज्ञ: पापं पुरोहित:।
भर्ता च स्त्रीकृतं पापं शिष्यपापं गुरुस्तथा।
आचार्य चाणक्य ने अपने इस श्लोक में बताया है कि अगर किसी राज्य या फिर देश में जनता कोई गलत कार्य कर रही है तो उनके कर्मों का फल शासक या फिर देश के राजा को भी भोगना पड़ता है। राजा की जिम्मेदारी होती है कि उसकी जनता कोई भी अनैतिक कार्य ना करें। क्योंकि जनता की गलती का परिणाम उसे भी भोगना पड़ता है।

इन्हें मिलती है राजा के कर्मों की सजा

श्लोक में आगे लिखा है कि राजा के गलत कर्मों के फल का जिम्मेदार उसका सलाहकार, मंत्री या फिर पुरोहित होता है। अगर ये राजा को गलत कार्यों की जानकारी नहीं देते हैं या फिर सही सुझाव नहीं देते हैं तो राजा के गलत कार्यों के जवाबदेह सलाहकार, मंत्री या फिर पुरोहित होते हैं। सलाहकार का कार्य होता है कि वह राजा को सही सलाह दे और गलत कार्यों के बारे में जानकारी दे। जहां ऐसा नहीं होता है वहां राजा और इनके मंत्र एवं सलाहकारों को भी नुकसान उठाना पड़ता है।

इस तरह पति को मिलती है सजा

आचार्य कहते हैं कि पत्नी कोई गलत कार्य करती है तो उसका जिम्मेदार उसका पति होता है। अगर वह अपने कर्तव्यों का पालन सही से नहीं करती है तो उसके कार्यो की सजा पति को ही भोगना पड़ता है। ठीक ऐसे ही अगर पति कोई गलत कार्य करता है तो उसके कर्मों का फल पत्नी को भुगतना पड़ता है।

 

गुरु होता है इसका जिम्मेदार

 

चाणक्य ने अपने श्लोक के अंत में कहा है कि अगर कोई शिष्य गलत कार्य करता है तो उसके कर्मों का बुरा फल गुरु को भोगना पड़ता है। गुरु का कर्तव्य होता है कि उसका शिष्य सही रास्ते पर चले और सही कर्म करे। अगर शिष्य ऐसा ना करके गलत रास्ते पर चलता है तो उसके कर्मों का फल गुरु को भी भुगतना पड़ता है। शिष्य अयोग्य होने पर गुरु की भी बदनामी होती है।


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