केंद्रीय स्कूल में मनाया दादा-दादी, नाना-नानी दिवस, विभिन्न प्रतियोगिताएं भी हुईं!

2018-12-04 07:27:05

दादा दादी को याद आया बचपन नही रोक सके अपने ऑसू 

नीमच !केंद्रीय विधालय में दादा-दादी नाना-नानी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के दौराना स्वूâल में पहुंचे बच्चों के कार्यक्रम देख दादा-दादी और नाना-नानी को भी अपना बचपन याद आगया ! उनके ऑखों में आंसू आ गए! कार्यक्रम शुभारंभ स्कूल प्राचार्य ग्रेसी लाकडा ने मां सरस्वती के समक्ष दीप जलाकर किया।

इस कार्यक्रम में कक्षा एक से चार तक के बच्चों के दादा-दादी व नाना-नानी ने भाग लिया। कार्यक्रम में बच्चों ने अपने दादा-दादी नाना-नानी को पुâल कार्ड देकर उनका स्वागत किया ! बाद में बच्चों ने अपने परिजनों के समक्ष मीठी बोली में कविताएं पेश की। और शिक्षक के निर्देशन में बच्चों के द्वारा बहुत ही मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत किए गया! फिर प्राथमिक विभाग के द्वारा रंगारंग संस़्कति कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसमें बच्चों ने तेरी नानी तेरी मोरनी को मार ले गया ...दादी अम्मा मान जाओं ..! इतनी हसी इतनी सी खुशी जैसे गीतों व दादा-दादी और बेटी बचाओं का संदेश देते हुए नाटक का मंचन किया गया ! कार्यक्रम के इस मंचन को देख जहां दादा-दादी को अपने बचपन की याद आगई और उनके ऑख में आंसु आ गए! अनुभवी वरिष्ट शिक्षक अनित अहमद द्वावारा अपने विचार प्रकट करते हुए कहॉ दाद-दादी/नानानानी के बीना जीवन अधूरा है! लेकिन मे भ्ज्ञी अब दादा और नाना की उम्र में आगया हूं दाद-दादी ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहॉ की में बहुत सौभागयशाली की बात है! की हमारें बच्चें बहुत ही आगें निकल गए! हमारे समय में इतनी सुविधाए नहीं थी! लेकिन इस समय बच्चों को बहुत सुविधा मिल रही है! बैरागी जी ने अपने विचार रखें कहॉ कि इतनी सुविधा मिलने के बाद हमारें बच्चों का मन पढाई में नही लगता है! प्राचार्य ग्रेसी लाकडा ने उदबोधन में जीवन में दादा-दादी का महत्व बताया और कहॉ की जिस प्रकार जिस प्रकार पानी बिना जीवन अधूरा है! उसी प्रकार घर परिवार में बुर्जगों के बिपस जीवन अधूरा है! कार्यक्रम का संचालन बलराम मीणा के द्वारा किया गया! आभर वरिष्ट्र शिक्षकफिरोज माहिन ने माना     


Responses


Warning: Invalid argument supplied for foreach() in /home/justneemuch/public_html/description.php on line 378

Leave your comment