नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 17 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10,000रू. जुर्माना। 

2018-12-06 12:06:33

जावद। श्री नीतिराज सिंह सिसौदिया, अपर सत्र न्यायाधीश, जावद द्वारा एक आरोपी को 16 वर्ष की नाबालिग का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोप का दोषी पाकर 17 वर्ष के सश्रम कारावास एवं कुल 10,000रू. के जुर्माने से दण्डित किया।

 

जिला अभियोजन अधिकारी श्री आर. आर. चौधरी द्वारा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि घटना लगभग तीन वर्ष पुरानी होकर दिनांक 20.11.2015 की हैं। फरियादी पिता ग्राम बावल में रहता हैं तथा घटना दिनांक को जब वह मजदूरी करके घर लोटा तो उसके उसकी 16 वर्षीय नाबालिग पुत्री घर पर नही मिली, जिसकी उसने गॉव में काफी तलाश की परंतु वह नही मिली तो उसने पुलिस थाना जावद में शंका के आधार पर आरोपी गणेश के विरूद्ध रिपोर्ट लिखाई, जिसे अपराध क्रमांक 438/15, धारा 363 भादवि के अंतर्गत दर्ज किया गया। घटना के लगभग 2 माह पश्चात् दिनांक 27.01.2016 को पुलिस द्वारा पीड़िता को दस्तयाब किया गया। पीडिता द्वारा पुलिस को बताया गया कि आरोपी जबरन उसका अपहरण करके उसको निम्बाहेडा (राजस्थान) से चित्तौडगढ़ (राजस्थान) होता हुआ केरल ले गया था जहॉ पर उसने उसके साथ कमरे में जबरदस्ती दुष्कर्म किया था। पुलिस द्वारा पीड़िता का मेडिकल कराकर उसके उम्र संबंधित दस्तावेज प्राप्त कर धारा 366, 376(2)(एन) भादवि का ईजाफा कर चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया।

 

श्री जगदीश चौहान, अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी द्वारा अभियोजन की ओर से 16 वर्षीय नाबालिग पीड़िता, उसके माता-पिता, पीड़िता के साथ दुष्कर्म हुआ यह प्रमाणित कराने के लिए उसका मेडिकल करने वाले डॉक्टर तथा पीडिता को नाबालिक प्रमाणित करने के लिए स्कॉलर रजिस्टर प्रस्तुत करने वाले अध्यापक सहित सभी आवश्यक गवाहों के बयान न्यायालय में कराकर आरोपी के विरूद्ध अपराध को संदेह से परे प्रमाणित कराया गया। दण्ड के प्रश्न पर श्री चौहान द्वारा तर्क रखा गया कि आरोपी द्वारा नाबालिग का अपहरण कर लगभग 02 माह तक अलग-अलग स्थानो पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया हैं, अतः आरोपी को कठोर दण्ड से दण्डित किया जाये। अभियोजन के तर्को से सहमत होकर श्री नीतिराज सिंह सिसौदिया, अपर सत्र न्यायाधीश, जावद द्वारा आरोपी गणेश पिता कन्हैयालाल रेगर, उम्र-24 वर्ष, निवासी-ग्राम बावल, थाना-जावद, जिला-नीमच को धारा 366 भादवि (दुष्कर्म करने के लिये अपहरण करना) में 07 वर्ष का सश्रम कारावास व 5,000रू. जुर्माना तथा 376(2)(एन) भादवि (अव्यस्क के साथ दुष्कर्म करना) में 10 वर्ष के सश्रम कारावास व 5,000रू. जुर्माना, इस प्रकार आरोपी को कुल 17 वर्ष के सश्रम कारावास व 10,000रू. जुर्माने से दण्डित किया गया। न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी श्री जगदीश चौहान, एडी.डीपीओ द्वारा की गई। 


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