क्‍या आपको भी हैं ये कष्‍ट, पहचानें वास्‍तु दोष, जानें उपाय!

अगर आपके घर में वास्‍तु दोष है तो घर के सदस्‍यों को कोई न कोई कष्‍ट झेलना ही पड़ता है। मगर हम समझ नहीं पाते हैं कि किस वास्‍तुदोष के कारण हमें कष्‍ट का सामना करना पड़ रहा है। अपने कष्‍ट को पहचानकर आप जान सकते हैं कि आपके घर में कौन सा वास्‍तु दोष हो सकता है। आइए जानते हैं कि किस कष्‍ट के होने पर कौन सा वास्‍तु दोष होगा…

1/8अस्‍वस्‍थता हो तो

यदि घर का मालिक अस्‍वस्‍थ रहता है तो इसका कारण नैर्ऋत्‍य कोण का नीचा होना हो सकता है। या फिर उस दिशा में किसी प्रकार के गड्ढे की मौजूदगी के कारण ऐसा हो सकता है। यदि इस दिशा में कोई कुंआ या पानी या फिर कोई अन्‍य जल स्रोत हो तो उसे बंद करवा देना चाहिए।

आय से अधिक खर्च होना

अगर आपके घर में आय से अधिक खर्च हो रहा है और आप पैसे बिल्‍कुल भी नहीं बचा पाते हैं तो इसकी वजह उत्‍तर दिशा में गंदगी होना भी हो सकता है। उत्‍तर दिशा दक्षिण से ऊंची होने पर भी मां लक्ष्‍मी प्राय: अस्थिर रहती हैं। इसके उपाय के तौर पर आप उत्‍तर दिशा में श्रीयंत्र भी स्‍थापित कर सकते हैं।

घर में क्‍लेश रहता हो तो

घर में क्‍लेश का प्रमुख कारण आग्‍नेय कोण, जिसका स्‍वामी शुक्र है, का दोषपूर्ण होना है। ध्‍यान रहे कि इस कोण में पानी का कोई स्रोत नहीं होना चाहिए और यह कोण नैर्ऋत्‍य कोण से नीचा होना चाहिए। आग्‍नेय कोण में रसोई को स्‍थापित करना सबसे उत्‍तम माना जाता है।

संतान सुख से वंचित होना

अगर आपके घर में किलकारियां नहीं गूंज पा रही हैं तो इसका कारण पूर्व दिशा में दोष भी हो सकता है। वंश वृद्धि के प्रमुख देवता सूर्य हैं और वह पूर्व दिशा के स्‍वामी है। पूर्व दिशा में किसी भी प्रकार का दोष वंश वृद्धि में व्‍यवधान डालता है। ध्‍यान रखें कि यह दिशा साफ-सुथरी खुली और दक्षिण-पश्चिम से ऊंची न हो।

मन अशांत रहने की समस्‍या

मन की शांति के देवता गुरु हैं तो ईशान कोण का स्‍वामी है। यदि ईशान कोण दूषित होता है तो मन अशांत रहता है। आपका मन शांत रहे और पूजा-पाठ में लगे, इसके लिए ईशान कोण की ओर मुख करके ध्‍यान करना चाहिए।

पड़ोसियों से अक्‍सर झगड़ा होना

अगर आपका अपने पड़ोसियों से अक्‍सर बिना किसी बात के झगड़ा होता है तो इसका कारण वायव्‍य कोण में दोष हो सकता है। नैर्ऋत्‍य कोण से ऊंचा होने पर वायव्‍य कोण दोषपूर्ण माना जाता है। पंचमुखी रुद्राक्ष की माला धारण करने से आपको लाभ मिल सकता है।

सुख समृद्धि में कमी

दक्षिण दिशा में दोष होने पर सुख समृद्धि में कमी आती है। इस दिशा को भारी बनाकर दोष को दूर किया जा सकता है।

हर कार्य में रुकावट आन

 

अगर आपके घर के ब्रह्म स्‍थल में कोई दोष होता है तो आपका कोई काम समय से नहीं हो पाता है और व्‍यवधान उत्‍पन्‍न होते हैं। जीवन में सफलता पाने के लिए ब्रह्म स्‍थल को खाली और साफ-सुथरा रखें।