2026-08-26 08:21:09
कृति संस्था का मेरा जीवन मेरे अनुभव कार्यक्रम संपन्न समाज में योगदान के लिए पद केवल एक माध्यम है- हेमलता अग्रवाल
महिला कुछ बनने के लिए परिश्रम कर रही है तो उसे प्रोत्साहित करें – एश्वर्या मूंदडा
नीमच | यह विचार पुलिस और शिक्षा विभाग से जुडी अधिकारियो ने नगर की अग्रणी साहित्यिक,सांस्कृतिक ,सामाजिक संस्था कृति के महिला प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित मेरा जीवन मेरे अनुभव कार्यक्रम में व्यक्त किये | कार्यक्रम का प्रारम्भ सरस्वतीजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ| अतिथियों का स्वागत संस्था के अध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी ,महिला प्रकोष्ठ प्रभारी श्रीमती आशा साम्भर और श्रीमती मंजुला धीर ने किया | अपने स्वागत उद्बोधन में संस्था ध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम इस मायने में अनूठा है कि इसमें आज हम प्रशासन के अलग-अलग विभागों के अधिकारियों के प्रशासन और परिवार के समन्वय के अनुभवों से रूबरू होंगे | अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती हेमलता अग्रवाल ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि मैंने अपनी सारी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी अपने गृह नगर गुना में रहकर ही की | 2012 में मेरा चयन हुआ लेकिन पुलिस की सेवा मेरी प्राथमिकता में नही थी इसलिए मैं खुश नहीं थी | दुबारा प्रयत्न करने पर जब मुझे सफलता नही मिली तो फिर मेरा मन पुलिस सेवा में रम गया | मैंने अपनी पढाई का खर्च न्यूनतम रखा ताकि मेरे माता पिता पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े | 2014 में विवाह के बाद नौकरी और परिवार की दोहरी जिम्मेदारी आ गई | प्रारम्भ में कुछ समस्याएं थी लेकिन बाद में सब ठीक हो गया | गुना जैसे छोटे शहर से इंदौर महानगर में आकर ससुराल में रहना भी थोड़ा मुश्किल था | मेरी सासू माँ ने बहुत पहले अपने पति और बाद में अपने छोटे बेटे को खो दिया था | इस कारण भी हम दोनों महिलाओं को परिवार में समायोजन में कठिनाई आई | उज्जैन में नौकरी का समय सबसे कठिन था | छुट्टियाँ नही मिलती थी ऐसे में मैं अपने डेढ़ साल के बच्चे से सप्ताहांत में ही मिल पाती थी | इस अवधि में मेरी सास और पति ने मुझे भरपूर सहयोग दिया | मेरे विद्यार्थी जीवन और फिर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान मेरी माँ ने मुझे बहुत प्रोत्साहित किया | पुलिस और जनता के बीच सम्बन्धों पर उनका कहना था कि यदि आप धैर्य पूर्वक जन सामान्य की समस्या को सुने और उसका समाधान कर दें तो जनता से पुलिस के सम्बन्ध बहुत अच्छे रहेंगे | अपनी पुलिस सेवा में यही मेरा उद्देश्य भी है|
कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती ऐश्वर्या मूंदडा परवाल ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि मेरी पहली पसंद इंजीनियरिंग थी | मैं इंजीनियर बनी भी और लगभग 9 महीने नौकरी भी की | इस दौर में मेरी बॉस ने मुझे सीखने और पढने के लिए बहुत प्रोत्साहित किया और मुझे बड़े ग्रंथालय में बैठकर केवल पढने हेतु प्रेरित किया | मेरे माता पिता ने भी मुझे प्रोत्साहित किया | जब लड़कियों को सिविल इंजीनियर बनने हेतु हतोत्साहित किया जाता था तब मेरे पिताजी ने मेरा साथ दिया | इंजनियर की नौकरी के साथ मेरा मन धीरे-धीरे प्रशासनिक सेवा में जाने का हुआ तब मैंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की | मेरा चयन कोषालय अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी के लिए हो गया तब मैंने शिक्षा को चुना | मेरा मानना है कि जो ज्ञान पुस्तकों से मिलता है वह और कहीं नही मिल सकता | पुस्तकों का कोई विकल्प नही है | रामचरित मानस मेरी प्रिय पुस्तक रही है | उसमें राम रावण युद्ध के समय युद्ध में विजय के लिए रामजी और विभीषण के संवाद जिसे राम गीता कहा जाता है से मुझे बहुत प्रेरणा मिली | नौकरी और फिर विवाह ने मेरे जीवन में परिवर्तन किया | मैं अपनी ससुराल नीमच आ गई | यहाँ मेरी तीसरी पदस्थापना है | मैंने अपनी नौकरी के छोटे से कार्यकाल में खूब काम किया और बहुत कुछ सीखा | मेरे दोनों परिवार मुझे हर तरह का सहयोग देते हैं | परिवार के साथ नौकरी करना मेरे लिए एक सुखद अनुभव है | आज भी मेहमानों के कारण मैं कार्यक्रम नही आने का विचार कर रही थी तब मेरी सासू माँ ने कहा कि वे तुम्हारा इन्तजार कर रहे हैं तुम्हे जाना चाहिए और देर से ही सही मैं आपके बीच हूँ | कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ज्ञानोदय विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डॉ माधुरी चौरसिया ने अपनी जीवन यात्रा के अनुभवों की चर्चा करते हुए दोनों ही अधिकारियों की कार्य शैली की सराहना की | कृति संस्था के इस कार्यक्रम में संस्था के सदस्य महेंद्र त्रिवेदी, भरत जाजू, राजेश जायसवाल, कमलेश जायसवाल , किशोर जेवरिया ,डॉ अक्षय पुरोहित ,जीवन कौशिक , प्रकाश भट्ट , शरद पाटीदार , मुकेश कासलीवाल , ओ पी सिंहल, सत्येन्द्रसिंह राठोर , शैलेन्द्र पोरवाल ,प्रथ्वीसिंह वर्मा , गणेश खंडेलवाल , कीर्ति कुमार चौधरी ,कैलाश बाहेती , दिलीप दुबे , जम्बुकुमार जैन , विमल कुमार जैन , डॉ वी के जैन , अनील चौरसिया , राधेश्याम शर्मा , राजेंद्र परिहार , महेश शर्मा , रमेश मोरे , सहित बड़ी संख्या में सुधी श्रोता उपस्थित थे | कार्यक्रम का संचालन श्रीमती साधना सेवक ने किया और आभार सचिव रघुनंदन पाराशर ने व्यक्त किया |
