बड़ा खुलासा: धानुका को बदनाम करने की बड़ी साजिश नाकाम, नाकोड़ा लुब्रिकेंट की 'काली करतूत' रंगे हाथों पकड़ी गई


नीमच में औद्योगिक क्षेत्र की आड़ में चल रहे खेल का एक सनसनीखेज सच सामने आया है। बीती रात न केवल पर्यावरण के साथ खिलवाड़ पकड़ा गया, बल्कि एक प्रतिष्ठित नाम 'धानुका' को बदनाम करने के कुत्सित प्रयास का भी भंडाफोड़ हुआ है। मामला नाकोड़ा लुब्रिकेंट का था, लेकिन साजिश के तहत नाम धानुका का उछालने की कोशिश की गई।
क्या है पूरा मामला?
नीमच के नाकोड़ा लुब्रिकेंट (Nakoda Lubricants) द्वारा कानून और पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर बीती आधी रात के अंधेरे में खेतों में जहरीला केमिकल युक्त पानी छोड़ने की कोशिश की जा रही थी। टैंकर चालक चुपके से इस काली करतूत को अंजाम दे रहा था, लेकिन जागरूक ग्रामीणों की सतर्कता ने इस मंसूबे पर पानी फेर दिया। ग्रामीणों ने मौके पर ही टैंकर को चारों तरफ से घेर लिया और हंगामा शुरू कर दिया।
साजिश का पर्दाफाश: काम नाकोड़ा का, नाम धानुका का
इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब ग्रामीणों ने टैंकर को पकड़ा। शुरुआती पूछताछ में एक सोची-समझी साजिश के तहत टैंकर ड्राइवर ने बताया कि "यह माल तो धानुका का है।"
ड्राइवर के इस झूठ का मकसद साफ था—मौके पर भीड़ के सामने धानुका का नाम लेकर उसे बदनाम करना। लेकिन सूचना मिलते ही नीमच सिटी पुलिस मौके पर पहुंची। जब पुलिस ने अपनी सख्ती दिखाई और ड्राइवर से कड़ाई से पूछताछ की, तो तोते की तरह उसने सच उगल दिया। उसने स्वीकार किया कि टैंकर और जहरीला केमिकल नाकोड़ा लुब्रिकेंट का ही है।
सक्रिय है बदनाम करने वाला सिंडिकेट?
इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि नीमच में कुछ कतिपय लोग एक सिंडिकेट की तरह काम कर रहे हैं, जो लम्बे समय से धानुका को बदनाम करने की फिराक में लगे हुए हैं।
 * सवाल यह उठता है: ड्राइवर को धानुका का नाम लेने के लिए किसने कहा था?
 * क्या अपनी काली करतूतों को छिपाने के लिए नाकोड़ा लुब्रिकेंट दूसरों के नाम का इस्तेमाल कर रहा है?
यह घटना उन चेहरों से नकाब उतारती है जो पर्दे के पीछे रहकर धानुका की छवि खराब करने का षड्यंत्र रच रहे थे।
पुलिस कार्रवाई और ग्रामीणों का आक्रोश
आक्रोशित ग्रामीणों ने बताया कि फैक्ट्री संचालक मनमानी पर उतारू हैं और जहरीले पानी से उनकी जमीनों को बंजर बना रहे हैं। पुलिस ने समझाइश देकर मामला शांत कराया और जहरीले पानी से भरे टैंकर को जब्त कर लिया है। पुलिस अब इस मामले की गहनता से जांच कर रही है कि आखिर पर्यावरण से खिलवाड़ के साथ-साथ इस 'नेम-गेम' (Name Game) के पीछे कौन है।
निष्कर्ष:
नाकोड़ा लुब्रिकेंट की यह करतूत न केवल पर्यावरण अपराध है, बल्कि एक कॉर्पोरेट साजिश की ओर भी इशारा करती है। लेकिन पुलिस की सूझबूझ और ग्रामीणों की जागरूकता ने धानुका को बदनाम करने के इस प्रयास को विफल कर दिया और असली गुनहगार का चेहरा बेनकाब कर दिया।